सामुदायिक ब्लॉग
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विशेष लेख
चौबीसा समाज ब्लॉग
सनातन धर्म में दान और सेवा का महत्व — निःस्वार्थ भाव से समाज सेवा की परंपरा
घर में जब भी भोजन बनता है, थाली परोसने से पहले एक कौर गाय के लिए, एक चींटियों के लिए और एक अतिथि की संभावना के लिए अलग रखा जाता है। किसी ने यह सिखाया नहीं, यह बस चला आ रहा है। यही आदत असल में बताती है...
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अन्य लेख
सनातन धर्म के प्रमुख पर्व और व्रत: महत्व और परंपरा
सनातन परंपरा में हर पर्व और व्रत सिर्फ एक तारीख नहीं है — वह किसी न किसी कहानी, किसी सीख, या प्रकृति के किसी बदलाव...
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श्राद्ध और पितृ पक्ष: पितरों के प्रति श्रद्धा और तर्पण की परंपरा
घर में जब कभी बड़े-बुज़ुर्गों की बात चलती है, तो एक अजीब सी चुप्पी और सम्मान का भाव अपने आप उतर आता है। श्राद्ध और...
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सनातन धर्म में वैदिक विवाह संस्कार — महत्व, परंपरा और सप्तपदी का अर्थ
शादी के मंडप में जब पंडित जी सप्तपदी के वचन पढ़वाते हैं, तो ज्यादातर मेहमान मोबाइल में व्यस्त होते हैं और दूल्हा-दु...
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गोत्र और कुलदेवी परंपरा — हमारी सांस्कृतिक विरासत की पहचान
किसी नए परिचय में जब कोई पूछ बैठे "आपका गोत्र क्या है?", तो जवाब अक्सर आधा-अधूरा ही मिलता है — नाम याद है, मतलब नही...
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यज्ञोपवीत संस्कार (उपनयन) — महत्व और विधि
घर में जब बच्चे के कंधे पर पहली बार जनेऊ चढ़ाया जाता है, तो कमरे का माहौल किसी और संस्कार जैसा नहीं होता। पुरोहित क...
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षोडश संस्कार — सनातन धर्म में जीवन के 16 संस्कार
घर में जब कोई नया जीवन आने वाला होता है, या कोई बच्चा पहली बार अन्न चखता है, या किसी की चिता को अग्नि दी जाती है —...
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